SLAVE DYNASTY POWERFUL OPPONENT
गुलाम वंश शक्तिशाली विरोधी
मोहम्मद गोरी के निःसन्तान होने के कारणय उसके महत्त्वाकांक्षी गुलाम और अमीर उसके विशाल साम्राज्य को दृष्टगत करने को उत्सुक थे। उस काल में तलवार ही सिंहासन की सबसे बड़ी निर्णायक थी। गोरी के अन्य तीन गुलाम-गजनी और अफगानिस्तान का शासक ताजुद्दीन एल्दौज, सिंध और उच्छ का शासक नासिरूद्दीन कुबाया तथा बिहार और बंगाल का शासक बख्तियार खिलजी अत्यन्त शक्तिशाली और महत्त्वाकांक्षी थे। वे ऐबक के सबसे बड़े प्रतिद्वन्दी थे।
एल्दौज ने पहले ही गजनी पर अधिकार कर लिया था। गजनी का स्वामी बन जाने के बाद वह गोरी के भारतीय साम्राज्य पर भी अपना नियंत्रण और प्रभुत्व स्थापित करना चाहता था। उसके भारत पर ऐबक के अधिपत्य को स्वीकार नहीं किया और वह स्वयं लाहौर और दिल्ली पर अधिकार करने की योजना बना रहा था। गजनी का शासक होने के कारण वह अपने आप को भारतीय साम्राज्य का सम्प्रभु समझता था।
गोरी की मृत्यु के पश्चात् नासिरूद्दीन कुबाया, सिंध और सुल्तान का स्वतंत्र शासक बन बैठा था। शक्ति और प्रतिष्ठा भी काफी बढ़ गयी थी। वह अन्य भारतीय क्षेत्रों पर भी अधिकार करना चाहता था।
गोरी के जीवन काल में ही बख्तियार खिलजी ने मुस्लिम सत्ता का विस्तार बंगाल तथा बिहार में किया । बख्तियार की मृत्यु के बाद उसके पुत्र इख्तियारूद्दीन मुहम्मद ने बंगाल और बिहार में अपनी स्वतंत्र सत्ता की स्थापना कर ली, परन्तु कुछ ही समय बाद अलिमर्दन खाँ नामक एक सामन्त ने अख्तियारूदीन का बध कर बंगाल के राज्य को हड़प लिया। वह दिल्ली सल्तनत के नियंत्रण से पूर्ण स्वतंत्र था। ऐबक के लिए अलिमर्दन खाँ भी एक चुनौती था।
इस प्रकार कुतुबुद्दीन ऐबक के ये तीन शक्तिशाली और महत्त्वाकांक्षी प्रतिद्वन्द्वी उसकी सत्ता को चुनौती दे रहे थे। उसे सर्वप्रथम अपने इन प्रतिद्वन्द्रियों का सामना करना था।
.jpeg)
.jpeg)
0 Comments